स्वराज पर गांधी के विचार क्या थे

गांधी न कोई दार्शनिक थे और न ही कोई राजनीतिक चिंतक । तथापि ब्रिटिश साम्राज्य के विरूद्ध संघर्ष में उसने व्यक्ति , समाज , अर्थव्यवस्था , राज्य , नैतिकता तथा कार्यपद्धति के रूप में अहिंसा पर आधारित अपने विशिष्ट विचारो का निर्माण किया। उसने राजनीति में आदर्शवाद का पुट जोड़ा और यह सिद्ध करने की कोशिश की कि नैतिकता ही राजनीति का सच्चा और एकमात्र आधार है। उसके चिंतन के अधिकतर प्रेरणास्रोत स्वदेशी थे परन्तु उसने पश्चिमी दार्शनिक चिंतन के मानवतावादी और उग्रवादी विचारो को भी आत्मसात किया। इस मिश्रण से उसने विचार और व्यवहार का एक ऐसा कार्यक्रम तैयार किया जा शुद्ध रूप से उसका अपना था। गांधी का राजनीतिक और नैतिक चिंतन सरल आध्यात्मिकता पर आधारित है। उसके अनुसार यह ब्रह्माण्ड ' सर्वोच्च बौद्धिकता ' अथवा ' सत्य ' या ' इश्चर ' द्वारा संचालित होता है। यह बौद्धिकता सभी प्राणियों में निवास करती है , विशेषकर व्यक्ति में , जिसे ' आत्म चेतना ' अथवा ' आत्मा ' का नाम दिया जाता है। गांधी ने इसे आत्म - अनुशासन और अहिंसा द्वारा आत्मज्ञान की प्रा...