राजनीति क्या है?

राजनीति की बहुत सी परिभाषाएं है। वास्तव में बीस पच्चीस शब्दों में राजनीति के समूचे 

विषय को समझा देना कठिन है। यह कठिनाई इसलिए और बढ़ गई कि राज्य और शासन सम्बन्धी ज्ञान को अनेक नामों से पुकारा जाता हैं, जैसे :-

राजनीति , राजनिति विज्ञान और राजनीति दर्शन ।

लेखकों का मत है कि राजनीति का अध्ययन केवल राज्य सविधान और कानून तक ही सीमित है।

जबकि बीसवीं सदी में विद्वानों ने राजनीति को एक गतिविधि या प्रक्रिया माना है।

राजनीति का अर्थ

प्राचीन यूनानी विद्वानों के अनुसार "मनुष्य स्वभाव से एक राजनीति प्राणी है।" सामाजिक जीवन का सार तत्व राजनीति है। परंपरावादी लेखकों के अनुसार राजनीति राज्य और सरकार का अध्ययन है। आधुनिक विद्वानों के अनुसार राजनीति एक व्यापक सामाजिक प्रक्रिया है। उसमे उन सभी पहलुओं की जांच की जाती हैं जो राजनीति संस्थाओं और प्रक्रियाओं से संबंध रखते हैं। राजनीति के विषय में अब कई धारणाएं प्रचलित हैं , जैसे :- उदारवादी , मार्क्सवादी , शक्तिवादी , समुदाय वादी और व्यवहारवादी ।

उदारवादी दृष्टिकोण : राजनीति का साधन हैं -

जहां समस्याएं होगी , वहां राजनीति अवश्य होगी । राजनीति की जड़ असहमति और संघर्ष में है।

समाज में विवाद या संघर्ष के अनेक स्त्रोत हैं, जैसे व्यक्ति की प्रकृति की मित्रताएं , धार्मिक , जातिगत और नस्ल की मित्रताए तथा संसाधनों का अभाव ।

हितो के बीच सामंजस्य या मेलमिलाप कायम करने वाले प्रमुख साधन इस प्रकार हैं :-

  • चुनावी प्रतियोगिता
  • संसदीय वाद विवाद 
  • कानून और न्यायपलिका
  • हित्समुहो की भूमिका :, तथा 
  • अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की राजनीति
मार्क्सवादी दृष्टिकोण : राजनीति वर्ग - संघर्ष का परिणाम है -

मार्क्सवादियों के अनुसार राज्य वर्ग संघर्ष की उपज है। सरकार चाहे जैसी भी हो , वह सिर्फ शासक वर्ग के विशेषाधिारों की ही रक्षा करती हैं। सर्वहारा वर्ग के पास इसके अलावा और कोई चारा नहीं की वह क्रांति करके उत्पादन के साधनों पर अपना अधिकार जमा ले । वर्ग हीन समाज में राज्य व राजनीति दोनों लुप्त हो जाते है।

शक्तिवाद्दी दृष्टिकोण :- 

कई आधुनिक लेखकों ने राजनीति को शक्ति के लिए संघर्ष के रूप में देखा है। 

लासवैल और कैप्लन  के शब्दों में , राजनीति 

शक्ति को संवारने और उसका मिल बांटकर प्रयोग करने का अध्ययन है ।लोग दूसरों का शासन करना चाहते है । वे सत्ता के भूखे होते हैं और शक्ति के लिए संघर्ष चलता रहता है। 

बर्नार्ड क्रिक  के  अनुसार , किििि

"किसको क्या मिलता है , यह इस बात पर निर्भर करेगा कि उसने कितना प्रयत्न किया है और वह समाज य सरकार पर कितना दवाब डाल सकता है।" 

जिस प्रकार राष्ट्रीय स्तर पर सत्ता प्राप्ति का संघर्ष चलता है, वैसे ही अंतरराष्ट्रीय जगत में भी उखाड़ - पछाड़ देखने को मिलती है। राजनीति के अन्तर्गत हम इन्हीं सब बातो का अध्ययन करते है। 

समुदाय वादी दृष्टिकोण :-

उदारवादी विचारधारा ' व्यक्ति की स्वतंत्रता ' पर बल देती है , जबकि मार्क्सवादी अवधारणा ' वर्ग संघर्ष ' पर आधारित है। ए. मेकिंटर  और अन्य समुदाय 

समुदाय वादियों ने इन दोनों विचारधाराओं की आलोचना की । उन्होंने समुदाय कि महत्ता और व्यक्ति के सामाजिक परिवेश पर अधिक बल दिया है। उदारवादी विचारधारा केवल व्यक्ति के अधिकार की चर्चा करते है , जबकि समुदाय वादीयो का कहना है कि अपना ध्यान समुदाय के प्रति कर्तव्यों पर केन्द्रित करो।

निष्कर्ष :-

राजनीति के अन्तर्गत सामाजिक जीवन के उन सभी पहलुओं की जांच की जाती है जो राजनीतिक संस्थाओं , राजनीति गतिवधियो व राजनीति प्रतिक्रियाओं से संबंध रखते हैं। इसमें सभी प्रकार के , समुदाय , राज्य , राष्ट्र , सरकार , राष्ट्रीय हित , युद्ध , शांति , अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति और अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों का अध्ययन शामिल है । सरसरी दृष्टि से देखा जाए तो राजनीति का संघर्ष सिर्फ ' सत्ता , अधिकार और कानून ' से ही है , पर सत्ता या कानून सिर्फ साधन हैं । उनका लक्ष्य समाज को नियंत्रित करना और माननीय विकास को बढ़ावा देना है । इसलिए राजनीति के आयाम बहुत है बढ़ जाते है।

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