"भारत एक उभरती हुई शक्ति है" आर्थिक और सैन्य कारकों पर प्रकाश डालते हुए इस कथन की पुष्टि कीजिए। . "India is an emerging power". Higlighting economic and military factors make this statement.
"भारत एक उभरती हुई शक्ति है" आर्थिक और सैन्य कारकों पर प्रकाश डालते हुए इस कथन की पुष्टि कीजिए। . "India is an emerging power". Higlighting economic and military factors make this statement.
एक अमरीको विद्वान स्टीफन पी. कोहेन ने अपनी 2001 में प्रकाशित पुस्तक India Emerging Power में उन विभिन्न तत्त्वों और कारकों का विश्लेषण किया है। उनके मतानुसार यह निर्धारित करने में सहायक होंगे कि क्या भारत निकट भविष्य में एक बड़ी शक्ति के रूप में उभर पाएगा या नहीं। भारत में निश्चय हो उभरने की क्षमता है और वह विश्व राजनीति में एक प्रमुख राष्ट्र के रूप में उभर रहा है।
भारत की आर्थिक स्थिति -
कोई भी देश बड़ी शक्ति बन पाने की अपेक्षा क्यों करता है। उदय होती और उभरती शक्ति के विषय में लिखते हुए कोहेन ने यह विचार व्यक्त किए उभरती शक्ति के विचार में निहित है पदसोपानीय वर्ग व्यवस्था में ऊंचे सोपान पर पहुंचने की इच्छा। इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए, अपना स्तर ऊँचा उठाने के लिए आर्थिक, सैनिक और राजनीति क्षमता प्राप्त करनी चाहिए। जहाँ तक भारत की आर्थिक व्यवस्था का प्रश्न है, अभी हाल के वर्षों तक इसकी अर्थव्यवस्था लड़खड़ा रही थी। किन्तु 1991 के पश्चात् उदारीकरण की नीति ने वह गति प्रदान की कि विश्व बैंक के अधिकारी यह कहने लगे कि लगभग 2030 तक संसार में भारत की अर्थव्यवस्था सबसे अधिक शक्तिशाली हो सकती है। भारत द्वारा 1991 में घोषित नई औद्योगिक नीति निजीकरण पर विशेष बल देती है। इसके अन्तर्गत रक्षा-उद्योग, आणविक ऊर्जा, पेट्रोलियम और कोयला आदि उद्योगों को छोड़कर शेष सभी उद्योग निजी क्षेत्र के लिए खोल दिए जाते हैं और सभी क्षेत्रों में प्रत्यक्ष पूंजी निवेश की अनुमति दे दी जाती है। भारत ने अपनी इस नीति के माध्यम से अपार धन अर्जित किया। सन् 2007 में भारत की अर्थव्यवस्था में 9 प्रतिशत को वृद्धि हुई। विदेशी मुद्रा भंडार में भी वृद्धि हो रही है तथा भारतीय रुपया शक्तिशाली हो रहा है।
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कोहेन ने 2001 में लिखा था कि आर्थिक और विकास के नए उपागम भारत को सबसे तेज गति से प्रगति करने वाली अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना दिया था। विकास की गति बढ़ रही है। भारत की बढ़ती प्रगति को देख जी-8 के देशों ने अपने सम्मेलनों में भारत को भी आमंत्रित करना शुरू कर दिया है।
भारत पिछले कुछ वर्षों के दौरान एक बड़ी ताकत के रूप में उभरा है। आर्थिक क्रियाकलापों में अभिवृद्धि निम्नलिखित बातों में दिखाई पड़ती है।
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के सक्रिय सहयोग से भारत व्यापक प्रगति की ओर अग्रसर है किन्तु ग्रामीण भारत के लिए अभी भी बहुत करना शेष है। निर्धनता | निवारण और देश के लिए अभी भी बहुत करना शेष है। निर्धनता निवारण और देश की सुरक्षा के लिए और भी कदम उठाने शेष हैं। भारत के व्यापक विकास कार्य में न केवल संयुक्त राष्ट्र बल्कि अनेक विकसित देश की सक्रिय सहयोग दे रहे हैं। इन देशों में प्रमुख हैं, ब्रिटेन, संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान, फ्रांस, जर्मनी, रूस और आस्ट्रेलिया । अर्नेस्ट एंड यग की रिपोर्ट के अनुसार भारत सहित अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाएँ वर्ष 2050 तक आर्थिक विकास के मामले में विकसित देशों को पीछे छोड़ देंगी।"
भारत एक सैनिक शक्ति-
भारत विश्व में चौथी सबसे बड़ी सैन्य शक्ति के रूप में जाना जाता है। किसी भी राष्ट्र की शक्ति अनेक तत्त्वों या स्रोतों के आधार पर आँकी जाती है। जैसे-देश का आकार, उसकी स्थिति, उसकी जलवायु, उसकी. जनसंख्या, उसके प्राकृतिक संसाधन, उसकी आर्थिक क्षमताएँ, सैनिक क्षमताएँ और राष्ट्रीय मनोबल। इनमें सैनिक बल अनेक तत्त्वों में से केवल एक है। किसी भी देश की आर्थिक शक्ति उसके सैन्य बल के निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। भारतीय सैन्य बल तीन अंगों पर आधारित है-थलसेना, नौसेना और वायुसेना। ये तीनों विभाग का प्रधान रक्षा विभाग होता है।
आज भारत सैन्य सृष्टि से शक्ति सम्पन्न देश है। आज इसके पास उच्च तकनीक वाले हथियार हैं, भारत अपने हथियारों का अधिकतर आयात अमेरिका इजरायल, फ्रांस और रूस से करता है। पिछले तीन वर्षों में सैनिक साजोसामान के आयात पर 10 अरब डालर की राशि खर्च हुई है।
संयुक्त नौसैनिक अभ्यास -
भारत का 90 प्रतिशत व्यापार समुद्र के जरिए होता है। हिंद महासागर के सीमावर्ती प्रदेशों में आतंकवाद का बढ़ता खतरा, हथियारों और मादक पदार्थों की बढ़ती तस्करी के कारण चुनौतियाँ काफी बढ़ गई हैं। भारत का लगभग 70 प्रतिशत ऊर्जा आयात भी समुद्र के जरिए होता है इसलिए सामुद्रिक शक्तियों के मध्य सहयोग बढ़ाने पर सहमति बढ़ी है। जापान की ऊर्जा सुरक्षा और इसका विदेशी व्यापार भी हिन्द महासागर की सुरक्षा पर निर्भर करता है। भारत और जापान के मध्य सहयोग की भावना में गति आई है। 2001 में अमेरिका के सर्वाधि क बड़े युद्धपोत ने भारत में लंगर डाले रखा, जो भारत और अमेरिका के मध्य बढ़ते सहयोग को रेखांकित करता है। अमेरिका, जापान, भारत और आस्ट्रेलिया हिंदमहासागर और प्रशांति महासागर पर अपना वर्चस्व चाहते हैं ताकि चीन के साम्राज्यवादी इरादों पर रोक लगाई जा सके।
भारतीय वायुसेना की लड़ाकू क्षमता -
वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल फाली एच. मेजर ने जुलाई 2007 में हिन्दी दैनिक नवभारत टाइम्स के साथ हुए एक साक्षात्कार में कहा था कि "हम किसी की चुनौती का मुकाबला करने में पूरी तरह सक्षम हैं। भारतीय वायु सेना अब एक परिपक्व अंतरिक्ष वैज्ञानिकी ताकत के तौर पर विकसित हो चुकी है। हमारे शस्त्र भंडार में काफी उन्नत और सक्षम विमान हैं।" वायुसेना के आधुनिकीकरण के लिए दो स्तरों पर कार्य किए जा रहे हैं। मिग-21, मिग-127 और जगुआर विमानों को तो पहले ही आधुनिक बनाया जा चुका है। अब मिग-29, मिराज-2008 और आइ.एल.-76 विमानों के आधुनिकीकरण की तैयारी चल रही है। हल्के युद्ध विमान 'तेजस' का उड़ान परीक्षण किया गया।
आज भारत के पास 'अवाक्स' और आसमान में ही ईंधन भरने वाले एयर रिफ्यूलर विमान भी हैं। अमेरिका से 130 जे. हर्कुलम विमान प्राप्त करने की भी योजना है।
संयुक्त वायु सेना अभ्यास-
जुलाई 2001 में ब्रिटेन के वेडिंग्टन हवाई अड्डे पर भारत के सुखो 30 और ब्रिटेन के ताईफुन लड़ाकू विमानों का साझा अभ्यास चला। अभ्यास में ब्रिटेन के अवाक्स टोही विमान भी सम्मिलित थे। ऐसे अभ्यासों का उद्देश्य एक दूसरे की समाघात क्षमता को परखना है। इससे लड़ाकू पायलटों में आत्मविश्वास उत्पन्न होगा। इस तरह के अभ्यास सामरिक साझेदारी को दर्शाते हैं।
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भारत एक परमाणु शक्ति-
सैनिक शक्ति के साथ घनिष्ठ रूप से संबद्ध है भारत का एक परमाणु अस्त्र सम्पन्न देश के रूप में विकास भारत को सदा से ही शस्यीकरण और अस्त्र नियंत्रण के प्रति वचनबद्धता रही है। किन्तु यह भी सत्य है कि भारत लम्बे समय से अपना परमाणु कार्यक्रम चला रहा है। मई 1998 में परमाणु है। परीक्षणों द्वारा उससे यह सिद्ध कर दिया को भारत एक परमाणु संपन्न राष्ट्र है।
https://www.edukaj.in/2020/08/international-environment-rules-and.html
बहुत बढ़िया
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