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Showing posts from May, 2022

How to solve natural environment?

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How to solve natural environment?  What is the analysis and interpretation of environmental awareness? Let us know how to solve environmental problems. Before solving the problems of the environment, we have to understand what is the problem of the environment, so let's know what is the problem of the environment and how to solve it? https://youtube.com/shorts/dGWSQiW3s-c?feature=share The challenges facing South Asian countries are to manage and protect land, water, and forest and air resources, to provide an appropriate standard of living, and to provide other environmental services that are currently devoid of them. At the same time, increasing the growth rate so that people can be inspired. Environment issue is an important problem for South Asian countries. South Asian countries are associated with problems like rapid urbanization, insanitary defecation facility, uncontrolled industrialization, deforestation etc. For example the construction of large dams, water systems and na...

संघर्षों की प्रकृति Nature of Conflicts

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संघर्षों की प्रकृति (Nature of Conflicts ) परिचय संघर्ष एक ऐसा शब्द है , जिसके अनेकों अर्थ हो सकते हैं, जैसे-लड़ाई, वाद-विवाद, युद्ध, असंगति आदि। संघर्ष का शाब्दिक अर्थ है “एक दूसरे से टकराव"। जब दो या दो से अधिक व्यक्तियों में या किसी समूह या वर्ग में किसी एक ही विषय पर विरोधाभास की स्थिति बन जाती है, तो संघर्ष की उत्पत्ति होती है। ऐसे में वे व्यक्ति अपना लक्ष्य बदलकर या अपना लक्ष्य छोड़कर आपस में समझौता करते हैं। कई बार मध्यस्थता के द्वारा समझौता कराया जाता है। यदि संघर्ष अपनी चरम सीमा पर पहुँच जाए, तो वह युद्ध का रूप ले सकता है या फिर बड़े झगड़े में परिवर्तित हो सकता है। संघर्ष का एक कारण संसाधनों की अपर्याप्तता या वितरण का दोष माना जा सकता है। संघर्ष किसी भी मुद्दे पर हो किंतु उसे सुलझाना जरूरी होता है, अन्यथा यह किसी बड़ी क्षति का कारण बन सकता है। संघर्ष का अर्थ संघर्ष का सामान्य अर्थ होता है-टकराव। अलग-अलग विद्वानों ने संघर्ष की विभिन्न परिभाषाएँ दी हैं। कुछ विद्वानों ने संघर्ष को आपसी विरोध, प्रतिद्वंद्विता या आपसी प्रतिरोध की स्थिति कहा है, जिसके अंतर्गत व्यक्तियों की ग...

The Best Use of Leisure

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The Best Use of Leisure "Leine is a necessity of modem man." Introduction: The time left free after regular hours of work in some occupation, is called leisure. This is the time when we can regain our lost energies Leisure provides rest and recreation. And we feel ourselves active and refresh. Necessity of leisure Continuous work makes a man dull. He becomes unfit for work Also read  https://www.edukaj.in/2022/05/marxist-concept-of-freedom.html If there is no rest and recreation, man loses a great deal of energy. All work and no play makes Jack a dull boy. We can use our leisure in one of the following activities:  (a) Games: One way of utilizing leisure is to take part in outdoor games and sports Games and sports remove fatigue. Blood circulates and the whole body becomes light and cheerful. It not only refreshes our mind and body but also enables us to work with zealand vigour. The best use of leisure  (b) Hobbies: Hobbies also serve a useful purpose in utilizing leisur...

स्वतंत्रता की मार्क्सवादी अवधारणा (MARXIST CONCEPT OF FREEDOM)

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 स्वतंत्रता की मार्क्सवादी अवधारणा (MARXIST CONCEPT OF FREEDOM) https://www.edukaj.in/2023/02/astronomers-succeeded-by-discovering-12.html मार्क्सवादियों ने स्वतंत्रता के उदारवादी सिद्धांत की कटु आलोचना की है और स्वतंत्रता की एक नवी अवधारणा प्रस्तुत की है, जिसका वर्णन निम्नलिखित शीर्षकों के अंतर्गत किया जा सकता है: https://www.edukaj.in/2023/01/today-we-will-know-who-is-first.html वर्गों में विभाजित समाज में असली स्वतंत्रता के लिए कोई स्थान नहीं है (There cannot be any Genuine Freedom in a Class-divided Society) स्वतंत्रता के विभिन्न प्रकार क्या है?  अवश्य पढ़े:- https://www.edukaj.in/2022/05/various-forms-of-liberty.html मार्क्सवादी विचारकों ने पूँजीवादी समाज का विश्लेषण करके उसकी असंगतियों की ओर हमारा ध्यान आकृष्ट किया। पूँजीवादी समाज में उत्पादन और वितरण प्रणाली दोषयुक्त होने के कारण सारी संपत्ति पूँजीपतियों के पास एकत्रित हो जाती है। जाम लोगों के पास जीवन निर्वाह करने भर को या उससे भी कम चीजें होती है। इस व्यवस्था में श्रमिकों, किसानों और • सर्वहारावर्ग के कष्टों का कोई अं...

स्वतंत्रता और कानून (LIBERTY AND LAW)

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 स्वतंत्रता और कानून (LIBERTY AND LAW) "राज्य का कानून" और "मनुष्य की स्वतंत्रता ऊपर से देखने पर परस्पर विरोधी बातें प्रतीत होती है। कुछ लेखकों ने दोनों के बीच स्वाभाविक विरोध माना है। किंतु गंभीरता से विचार करने पर इस सिद्धांत की कमियाँ समझ में आ जायेंगी। यहाँ हम स्वतंत्रता' और 'कानून के आपसी संबंधों के विषय में चार खास विचारधाराओं का वर्णन करेंगे। अराजकतावादी सिद्धांत कानून एक बुराई है। (Anarchist Doctrines: Law is an Evil) अराजकतावादियों ने राज्य और उसके कानूनों को जन-स्वतंत्रता का विरोधी माना है। क्रोपाटकिन (Kropotkin) औ चाकुनिन (Bakunin) का कहना है कि राज्य एक बुराई है और जन क्रांति द्वारा उसका तुरंत विनाश कर देना चाहिए रूसी विद्वान टाल्सटाय (Tolstoy) भी अराजकतावादी ही थे, यद्यपि उन्होंने हिंसक क्रांति द्वारा नहीं, बल्कि शांतिपूर्ण उप से राज्य की समाप्ति पर बल दिया है। इन विद्वानों के अनुसार समाज का संगठन ऐच्छिक सहयोग और स्वतंत्रता के आपर पर किया जाए, राजनीतिक आधार पर नहीं। उन्होंने जिस समाज का चित्र खींचा है, उसमें 'व्यवस्था' तो होगी परंतु 'विवश...

स्वतंत्रता के विभिन्न प्रकार ,VARIOUS FORMS OF LIBERTY

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स्वतंत्रता के विभिन्न प्रकार (VARIOUS FORMS OF LIBERTY ) मोटे रूप से स्वतंत्रता के तीन प्रकार हैं- नागरिक स्वंतत्रता, राजनीतिक स्वतंत्रता और आर्थिक स्वतंत्रता प्रायः यह कहा जाता है कि उदारवादियों ने नागरिक और राजनीतिक स्वतंत्रता को प्राथमिकता दी, जबकि मार्क्सवादियों ने आर्थिक अधिकारों को। नीचे हम स्वतंत्रता के इन तीनों प्रकारों के साथ-साथ 'राष्ट्रीय स्वतंत्रता' की भी चर्चा करेंगे। 1. नागरिक स्वतंत्रता (Civil Liberty)-नागरिक स्वतंत्रता के अंतर्गत निम्नलिखित स्वतंत्रताऍ शामिल हैं: (i) जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा (Protection of Life and Personal Liberty)- इसका अर्थ है कि प्रत्येक व्यक्ति को जीवित रहने का अधिकार है। प्राणरक्षा के लिए एक व्यक्ति आक्रमणकारी की जान तक ले सकता है। सरकार लोगों को मनमाने ढंग से गिरफ्तार नहीं कर सकती। मानव अधिकार घोषणापत्र (Universal Declaration of Human Rights) के अंतर्गत कहा गया है कि "किसी को भी उत्पीड़क, क्रूर, अमानवीय और निम्न कोटि की सजा नहीं दी जाएगी।" इसी प्रकार आहार-विहार, वेश-भूषा और रहन-सहन की दृष्टि से नागरिक स्वतंत्र हैं। ...

स्वतंत्रता की अवधारणा (THE CONCEPT OF LIBERTY)

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 स्वतंत्रता की अवधारणा (THE CONCEPT OF LIBERTY) https://www.edukaj.in/2023/02/astronomers-succeeded-by-discovering-12.html हर युग का इतिहास 'स्वतंत्रता' और राजसत्ता' के बीच संघर्ष का इतिहास रहा है। स्वतंत्रता के नाम पर जहाँ बड़े से बड़ा बलिदान किया गया है, वहीं उसकी आड़ में बहुत सी बुराइयों को भी बढ़ावा मिला है। 'स्वतंत्रता' के आदर्श से प्रेरित होकर मानव जाति आरंभ से ही संघर्ष करती आ रही है। यह संघर्ष सदा नए-नए रूपों में प्रकट होता आया है। 17वीं और 18वीं शताब्दी में स्वतंत्रता का अर्थ केवल "राजाओं के अत्याचार से छुटकारा" समझा जाता था; परंतु उसके बाद राजनीतिक विचारों में एक क्रांतिकारी परिवर्तन आया। स्वतंत्रता की भावना ने 'लोकतंत्रीय शासन को बढ़ावा दिया। कुछ समय बाद यह कहा जाने लगा कि 'स्वतंत्रता' की अनुभूति के लिए 'समानता' भी जरूरी है। https://www.edukaj.in/2023/01/today-we-will-know-who-is-first.html  लोकतंत्र और समाजवाद, ये दोनों एक-दूसरे के विरोधी नहीं, पूरक हैं। https://www.edukaj.in/2022/05/periar-on-identity-in-hindi.html स्वतंत्र...

PERIAR ON IDENTITY IN HINDI,अस्मिता के संबंध में पेरियार के विचार

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अस्मिता के संबंध में पेरियार के विचार (PERIAR ON IDENTITY) भारतीय समाज की यह विशेषता है कि इसमें जितना तीव्र 'वर्ग संघर्ष' है, उतना ही तेज, बल्कि उससे कुछ ज्यादा ही, वर्ग संघर्ष' भी है, जिसे प्रायः जाति प्रथा का नाम दिया जाता है। भारत में 'जाति विनाश' अभियान को बहुत जोर-शोर से चलाने वाले नेता रामास्वामी नावकर (1879-1973) हुए, जिन्हें उनके अनुयायी श्रद्धाभाव से 'पेरियार' कहकर बुलाते हैं। तमिल भाषा में पेरियार' शब्द का अर्थ है महापुरुष (Great Man) अथवा 'वयोवृद्ध' (Elder) | पेरियार का संक्षिप्त जीवन वृत्त (A BRIEF ACCOUNT OF PERIAR'S LIFE) पेरियार का जन्म तमिलनाडु के कोयंबतूर जिले में सन् 1879 में हुआ। जातिप्रथा, जो देश के लिए बड़ी बातक सिद्ध हुई, दक्षिण भारत में बड़े विकराल रूप में विद्यमान थी। वहाँ बहुत बड़ी संख्या में ऐसे लोग रहते थे जिन्हें 'अस्पृश्य और निचली जाति का घोषित किया गया। इन्हें कई नामों से पहचाना जाता था, जैसे शुद्र, पैरिआ (pariah), चाण्डाल, आदि। रामास्वामी का जन्म दलित परिवार में नहीं हुआ। नायकरों को हम दक्षिण भारत की पिछड़ी...