1857 की क्रांति का दमन
क्रांति का दमन
1 क्रांति के राष्ट्रव्यापी स्वरूप और, भारतीयों में अंग्रेंजी सरकार के प्रति बढने आक्रोश को देखकर अंग्रेजी सरकार घबरा गयी ।
2 क्रांति की विभीषिका को देखते हुए अग्रेंजी सरकार ने निर्ममतापूर्ण दमन की नीति अपनायी ।
3 तत्कालीन वायसराय लार्ड केनिंग ने बाहर से अग्रेंजी सेनाप मगवार्य
4 जनरल नील के नेतृत्व वाली सेना ने बनारस और इलाहाबाद में क्रांति को जिस प्रकार से कुचला, वह पूर्णत: अमानवीय था ।
5 क्रातिकारियों को छोड़ जनसाधारण का कत्ल कोषा किया गया गांवो लुटा गया और निर्देशों को भी फाँसी की सजा दी गई ।
6 दिल्ली में बहादुरशाह को गिरफ्तार कर लेने के बाद नरसंहार शुरू हो गया था।
7 कमाण्डर इन चीफ जनरल एनुसन उ राजमेण्टो को आदेश देकर फिरोजप जालधर फुलवर, अम्बाला आदि में निर्ममता के साथ लोगों की हत्या करवायी ।
8 नियमों का उल्लंघन कर कैदी सिपाहिये में से अनेको को तोप के मुह पर लगाकर उड़ा दिया गया।
9 पंजाब में सिपाहियो को घेरकर जिंदा जला दिया गया।
10 अंग्रेजो ने केवल अपनी सैन्य शक्ति के सहारे ही क्रांति को दमन नहीं किया, बल्कि उन्होंने प्रलोभन देकर बहादुरशाह को गिरफ्तार करवा दिया, उसके पुत्रो की हत्या करवा दी, सिक्खों और मद्रासी सैनिको को अपनी तरफ कर लिया ।
11 क्रांति के दमन में अंग्रेजों को इसलिए भी सहायता मिली की
विभिन्न क्षेत्रो मे अलग - अलग समय में क्रांति ने मोर के पकड़ा था।
1857 की क्रांति की महत्वपूर्ण जानकारी
https://www.edukaj.in/2022/06/1857.html
क्रांति की असफलता के कारण
1 क्रांतिकारियों ने जिस उद्देश्य से 1857 की क्रांति का सूत्रपात किया था. उसमे उन्हें सफलता नहीं मिली ।
2 उन्होंने सोचा था कि अंग्रेजो को बाहर खदेड़ कर भारत को स्वाधीन करदेगे।
3 क्रांति के दमन के बाद अग्रेजो के ऐसी नीति अपनायी की 90 वर्षों तक भारतीयों को गुलाम बनाए रखने में सफल हुए ।
इस महान क्रांति का असफलत के अनेक कारण थे, जिनमें कुछ प्रमुख है-
(A) निश्चित समय की प्रतिक्षा ना करना
1857 की क्रांति की देशव्यापी शुरुआत के लिए 31 मई 1857 का दिन निर्धारित किया गया था ।
1 एक ही दिन क्रांति शुरू होने से उसका व्यापक प्रभाव होता ।
2 सैनिकों ने आक्रोश में आकर निश्चित समय के पूर्व 10 मई, 1857 को ही विद्रोह कर दिया।
3 सैनिकों की इस कार्यवाही के कारण क्रांति की योजना अधूरी रह गई ।
4 निश्चित समय का पालन नही होने के कारण देश के विभिन्न क्षेत्रो में क्रांति की शुरुआत अलग-अलग दिनों से हुई।
5 इससे अंग्रेजों को क्रांतिकारियों दमन करने में काफी सहायता हुई।
6 अनेक स्थानों पर तो 31 मई की प्रतिक्षा कर रहे सैनिकों के हथियार धीन लिए गए ।
7 यदि सभी क्षेत्रो मे क्रांति का सुत्रपक्ष एक साथ हुआ, तो तस्वीर कुछ और ही होती ।
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(B) देशी राजाओ देशद्रोही रूख :
1857 की क्रांति का दमन करने मे अनेक देशी राजाओ ने अंग्रेजो की खुलकर सहायता की।
1 पटियाला, नाभा, जींदू, अफगनिस्तान और नेपाल के राजाओं ने अग्रेजो को सैनिक सहायता के साथ-साथ आर्थिक सहायता भी कि ।
2 देशी राजाओ की इस देशद्रोहितापूर्ण भूमिका ने क्रांतिकारियों का मनोबल तोडा और क्रांति के दमन के लिए अंग्रेजी सरकार को प्रोत्साहित किया ।
(C) साम्प्रदायिकता का खेल :
1857 ई० क्रांति के दौरान अंग्रेजी सरकार हिंदुओ और मुसलमानो को लड़ाने में तो सफलता प्राप्त नहीं कर सकी, परंतु आशिक रूप से ही सही साम्प्रदायिकता का खेल खेलने में सफल रहे।
1 साम्प्रदायिक भावनाओं को उभार कर ही अंग्रेजी सरकार ने सिक्ख रेजिमेण्ट और मद्रास के सैनिकों को अपने पक्ष में कर लिया ।
2 मराठो, सिक्खों और गोरखो को बहादुरशाह के खिलाफ खड़ा कर दिया गया।
3 उन्हें यह महसूस कराया गया, कि बहादुरशाह के हाथों में फिर से सत्ता आ जाने पर हिंदुओं और सिक्खों पर अत्याचार होगा ।
4 इसका मूल कारण था कि सम्पूर्ण पंजाब में बादशाह के नाम झूठा
फरमान अंग्रेजों की ओर से जारी किया गया, जिसमें कहा गया था कि लडाई में जीत मिलते ही प्रत्येक सिक्ख वध कर दिया जाएगा।
5 सैनिकों के साथ - साथ जनसाधारण को ही गुमराह किया गया ।
6 इस स्थिति में क्रांति का असफल हो जाना निश्चित ही गया।
7 जब देश के भीतर देशवासी ही पूर्ण सहयोग न दें, तो कोई भी क्रांति सफलता प्राप्त नहीं कर सकती ।
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(D) सम्पूर्ण देश मे प्रसारित न होना
1857 की क्रांति का प्रसार सम्पूर्ण भारत में ही नहीं हो सका ।
1 सम्पूर्ण दक्षिण भारत और पंजाब का अधिकांश हिस्सा इस
क्रांति से अछूता रहा।
2 यदि इन क्षेत्रों में क्रांति का विस्तार हुआ होता तो अंग्रेजो को अपनी शक्ति को इधर भी फैलाना पड़ता और वे पंजाब रेजिमेन्ट तथा मद्रास के सैनिकों को अपने पक्ष मे करने में असफल रहे।
(E) शस्त्रास्त्रों का अभाव :
1 क्रांति का सूत्रपात तो कर दिया गया, किंतु आर्थिक दृष्टि से कमजोर होने के कारण क्रांतिकारी आधुनिक शस्त्रास्त्रों का प्रबंध करने में असफल रहे।
2 अंग्रेजी सेना ने तोपो और लम्बी दूरी तक मार करने वाली बन्दुको का प्रयोग किया, जबकि क्रांतिकारियों को तलवार और भालो का सहारा लेना पड़ा ।
3 इसलिए क्रांति को कुचलने मे अंग्रेजों को सफलता प्राप्त हुई।
(F) सहायक साधनों का अभाव
सताधारी होने के कारण रेल डाक, तार एवं परिवहन तथा संचार के अन्य सभी साधन अंग्रेजों के अधीन थे | इसलिए इन साधनों का उन्होंने पूरा उपयोग किया । दूसरी और भारतीय क्रांतिकारीयों के पास इन साधनों का पूर्ण अभाव था ।
क्रांतिकारियों अपना संदेश एक स्थान से दूसरे स्थान तक शीघ्र भेजने में असफल रहे। सुचना के अभाव के कारण क्रांतिकारी संगठित होकर अभिमान बनाने में असफल रहे ।
(G) सैनिक संख्या मे अंतर :
एक तो विद्रोह करने वाले भारतीय सैनिको की संख्या वैसे ही कम थी, दूसरे अग्रेज सरकार द्वारा बाहर से भी अतिरिक्त सैनिक मगवा लिया गया था।
1 उस समय कम्पनी के पास वैसे 96,000 सैनिक थे।
2 इसके अतिरिक्त देशी रियासतो के सैनिकों से भी अंग्रेजों को सहयोग मिला ।
3 अंग्रेज सैनिकों को अच्छी सैनिक शिक्षा मिली थी और उनके पास अधुनातन शस्त्रास्त्र थे, परन्तु अपने परम्परागत हथियारों के साथ ही भारतीय क्रातिकारियो ने जिस संघर्ष क्षमता का परिचय दिया उससे कई स्थानों पर अंग्रेजो के दांत खटे हो गए ।
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