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भारतीय विदेश नीति के प्रमुख निर्धारक तत्त्वों की विवेचना कीजिए ?भारतीय विदेश नीति के मूल तत्वों की विवेचना कीजिए।

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 भारतीय विदेश नीति के प्रमुख निर्धारक तत्त्वों की विवेचना कीजिए ? भारतीय विदेश नीति के मूल तत्वों की विवेचना कीजिए। Explain basic principles of the Foreign policy of India.  भारतीय विदेश नीति से आप क्या समझते है? भारतीय विदेश नीति के मूल तत्व उसके आदशों एवं उद्देश्यों में स्वयं ही स्पष्ट हो जाते हैं। 1947 के पश्चात् भारतीय विदेश नीति एक स्वतन्त्र राष्ट्र की विदेश नीति मानी जाती है। यद्यपि भारतीय विदेश नीति के प्रमुख तत्वों को 1927 के मद्रास सम्मेलन में काँग्रेस ने अपनी विदेश नीति (आगामी भविष्य में) पत्र के जरिये प्रकाशित कर दिया था परन्तु तो भी स्वतन्त्रता के पश्चात् भारतीय विदेश नीति को स्पष्ट किया गया। हमारे तत्कालीन प्रधानमन्त्री पण्डित जवाहर लाल नेहरू जिन्होंने एक लम्बे समय तक विदेश मन्त्री का दायित्व भी सम्हाल रखा था, ने प्रारम्भ में ही स्पष्ट कर दिया था कि स्वतन्त्र भारत की स्वतन्त्र विदेश नीति का प्रमुख तत्व या आकर्षण होगा गुट-निरपेक्ष रहने का। पण्डित नेहरू ने भारतीय विदेश नीति बनाते समय साम्राज्यवाद तथा उपनिवेशवाद की आलोचना करते हुये कहा था कि वे दुनिया में स्वतन्त्रता...

"भारत एक उभरती हुई शक्ति है" आर्थिक और सैन्य कारकों पर प्रकाश डालते हुए इस कथन की पुष्टि कीजिए। . "India is an emerging power". Higlighting economic and military factors make this statement.

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 "भारत एक उभरती हुई शक्ति है" आर्थिक और सैन्य कारकों पर प्रकाश डालते हुए इस कथन की पुष्टि कीजिए। . "India is an emerging power". Higlighting economic and military factors make this statement. एक अमरीको विद्वान स्टीफन पी. कोहेन ने अपनी 2001 में प्रकाशित पुस्तक India Emerging Power में उन विभिन्न तत्त्वों और कारकों का विश्लेषण किया है। उनके मतानुसार यह निर्धारित करने में सहायक होंगे कि क्या भारत निकट भविष्य में एक बड़ी शक्ति के रूप में उभर पाएगा या नहीं। भारत में निश्चय हो उभरने की क्षमता है और वह विश्व राजनीति में एक प्रमुख राष्ट्र के रूप में उभर रहा है। भारत की आर्थिक स्थिति -  कोई भी देश बड़ी शक्ति बन पाने की अपेक्षा क्यों करता है। उदय होती और उभरती शक्ति के विषय में लिखते हुए कोहेन ने यह विचार व्यक्त किए उभरती शक्ति के विचार में निहित है पदसोपानीय वर्ग व्यवस्था में ऊंचे सोपान पर पहुंचने की इच्छा। इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए, अपना स्तर ऊँचा उठाने के लिए आर्थिक, सैनिक और राजनीति क्षमता प्राप्त करनी चाहिए। जहाँ तक भारत की आर्थिक व्यवस्था का प्रश्न है, अभी हाल के व...