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वनों की कमी तथा वनोन्मूलन के कारण बताइये।, वनों की कमी पर निबंध

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वनों की कमी तथा वनोन्मूलन के कारण बताइये। वनोन्मूलन रोकने के लिए उपाय बताइये। Explain causes of deforestation. Give measures to check deforestation. -वन प्राकृतिक संसाधन है तथा एक ऐसी संपदा है, जिसका उपयोग मानव आदिकाल से करता आया है और आज भी कर रहा है, किंतु आज के तकनीकी व वैज्ञानिक युग में बढ़ती जनसंख्या के दबाव और मानव की स्वार्थपरता ने इस प्राकृतिक संपदा के पर्यावरणीय महत्व को नहीं समझा तथा उसके उन्मूलन में ही प्रवृत्त हो गया। यह प्राकृतिक कारण और वन की आग भी इन्हें नष्ट करती है, परंतु यह उतनी हानिप्रद नहीं है, जितना कि मानव द्वारा वनों का विनाश है।  वन विनाश के कारण-वनोन्मूलन अथवा वन विनाश के मुख्य कारणों को निम्न प्रकार समझाया जा सकता है  (1) कृषि के लिये वन विनाश (Causes of Deforestation) - आज हमें विश्व में जो कृषि क्षेत्र दिखाई देता है, उसमें से अधिकांश वनों के नष्ट व साफ करके प्राप्त किया गया है। यह मानव के लिये आवश्यक भी था, क्योंकि कृषि क्षेत्रों से प्राप्त अन्न-रूपी भोजन मनुष्य की प्राथमिक आवश्यकता है, परंतु जब जनसंख्या में निरंतर वृद्धि होने से जनसंख्या विस्फोट ह...

अलंकार किसे कहते है?

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  अलंकार अलंकार से तात्पर्य -  अलंकार में 'अलम्' और 'कार' दो शब्द का अर्थ है-भूषण जावट अर्थात् जो अलंकृत या भूषित करे, वह अलंकार है। सिक्यों अपने साज-शृंगार के लिए आभूषणों का प्रयोग करती है. अतएव आभूषण' अलंकार' कहलाते हैं। ठीक इसी प्रकार कविता कामिनी अपने शृंगार और सजावट के लिए जिनों का उपयोग प्रयोग करती है, से अलंकार कहलाते है। अत: हम कह सकते हैं कि काव्य के शोभाकारक धर्म अलकार है। जिस प्रकार र आदि अलंकार रमणी के नैसर्गिक सौंदर्य में चार चाँद लगा देते हैं, उसी प्रकार अनुप्राप्स, यमक और उपमा आदि अलंकार काव्य के सौंदर्य को अभिवृद्धि करते हैं। वस्तुतः अलंकार वाणी के शृंगार हैं। इनके द्वारा अभिव्यक्ति में स्पष्टता, प्रभावोत्पादकता और चमत्कार आ जाता है।  उदाहरण के लिए निम्नलिखित वाक्यों को देखिए : 1. (क) राकेश की चाँदनी यमुना के जल पर चमक रही थी।   (ख) चारुचंद्र की चपल चांदनी चमक रही यमुना जल पर। 2. (क) उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे।     (ख) सावन के बादलों-सी उसकी आँखें बरसने लगीं। 3. (क) पति को छोड़कर और कोई वरदान ले लो।      (ख) घर को ...

बढ़ते उद्योग, सिकुड़ते वन , बढ़ती जनसंख्या : सिकुड़ते वन , वन रहेंगे , हम रहेंगे , वन और हमारा पर्यावरण , अगर वन न होते , वनों से पर्यावरण संरक्षण

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बढ़ते उद्योग, सिकुड़ते वन   1. वनों के लाभ-प्राकृतिक सौंदर्य तथा पर्यावरण संतुलन प्रकृति का अनुपम उपहार है। इस अमूल्य संपदा के कोष को बनाए रखने की महती आवश्यकता है। पेड़-पौधे तथा मनुष्य एक-दूसरे के पोषक तथा संरक्षक है। जहाँ एक ओर पेड़-पौधे मनुष्य के संरक्षण में उगते हैं, वहीं दूसरी और मानव को भी आजीवन देड-पौधों पर आश्रित रहना पड़ता है। इन वृक्षों पेड़-पौधों अथवा वनों से प्राकृतिक तथा पर्यावरण संतुलन बना रहता है। संतुलित व तथा प्रदूषण से बचाव के लिए भी वनों के संरक्षण को नियंत आवश्यकता है। इतना ही नहीं शस्य श्यामला भूमि को बंजर होने बचाने भू - क्षरण , पर्वत-स्खलन आदि को रोकने में भी वन संरक्षण अनिवार्य होता है। प्रकृतिक सुषमा के घर है। इन्हीं क अनेक वन्य प्राणियों को आश्रय मिलता है।  हमारे देश में तो वृक्षों को पूजने की परंपरा है। हमारी संस्कृति का कार्य माना जाता है तथा किसी फलदार अथवा हरे-भरे वृक्ष को काटना पाप पुराणों के अनुसार एक वृक्ष लगाने से उठना हो पुल पुढे का खेद का विषय है कि आज हम वन संरक्षण के प्रति उसीहोर कर उनको कटाई करके अपने पर कुल्हाड़ी मार रहे हैं, जिससे प्रकृ...

भारतीय किसान , भारतीय किसान की दशा ,भारतीय किसान: देश की रीढ़

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  भारतीय किसान  कृषक का स्वभाव एवं श्रम  भारत गांवों का देश है । भारत का ह्रदय गांवों में ही बसता है । गांवो में ही परिश्रम और सेवा के अवतार किसान बसते हैं, जो नगरवासियों के अन्नदाता ही नहीं सृष्टि के पालक हैं । भारतीय किसान ' कठोर परिश्रम ' , सरल ह्रदय , त्याग और तपस्वी जीवन , सादगी , जैसे गुणों  का पर्याय है । कड़कड़ाती सर्दी , चिलचिलाती धूप , घनघोर वर्षा , हाड़ कपा देने वाली सर्दी में भी वह एक तपस्वी की भांति अपनी साधना में लीन रहता है । वह हर विपत्ति को चुपचाप सहन कर लेता है , अभावों में जीने की उसे आदत है , रूखा - सुखा खाकर वह अपना पेट भर लेता है , मोटा कपड़ा पहनकर वह अपना तन ढंक लेता है । अपने इस कठोर जीवन की वह न तो कभी किसी से शिकायत करता है  तथा न ही स्वंय के लिए ऐश्वर्य एवं भोग - विलास की सामग्री की मांग । उसके जीवन का तो बस एक ही उद्देश्य है - मिट्टी से सेना उत्पन्न करना और अन्नपूर्णा की तरह दूसरो का पेट भरना । https://www.edukaj.in/2022/12/sustainable-human-development-issues.html एक बार नारद ने भगवान विष्णु से पूछा , " हे प्रभु! अपका परम भक्त कौन है...

समय का महत्व , Importance of time in Hindi

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  समय का महत्व  समय जीवन है और समय को नष्ट करना जीवन को नष्ट करना है । एक आम कहावत है कि " जो समय को नष्ट करता है , समय उसे नष्ट कर देता है । " समय का सदुपयोग विकास की कुंजी         जीवन नदी की धारा के समान है । जैसे नदी की धारा ऊंची - नीची भूमि को पार करती निरन्तर आगे बढ़ती रहती है उसी प्रकार जीवन की धारा भी सुख - दुख तथा सफलता - असफलता के अनेक संघर्षों को सहते - भोगते आगे बढ़ती रहती है । बहना जीवन है और ठहराव मृत्यु । जीवन का उद्देश्य निरन्तर आगे बढ़ते रहने में है - इसी में सुख है , आंनद है । लेकिन सुख - आंनद और आगे बढ़ने में जो वस्तु काम करती है , वह है समय । जो भोगते हुए समय को पकड़कर इसके साथ - साथ चल सकते हैं , वही तो जीवन में कामयाब होते है । वस्तुत: समय का सदुपयोग ही विकास की कुंजी है । अमूल्य धन              अंग्रेजी में समय को ' धन ' कहा जाता है , पर समय ' धन ' से कहीं ज्यादा कीमती है , अमूल्य है । धन आज है , कल नष्ट हो गया , परसों फिर आ सकता है । लेकिन जो समय अतीत के गर्त में समा गया , लाख चेष्टा करने पर भी वह ल...

परमाणु ऊर्जा: इसका उपयोग और दुरुपयोग

" शांति ने युद्ध की तुलना में कोई कम प्रसिद्ध नहीं जीत ली है। "                                                                       - मिल्टन           परिचय:-               मानव दुनिया बहुत शुरुआत से बदल रही है सब से बड़ा परिवर्तन अणु की खोज के कारण हुआ है।इसने सारी मानव-सोच में क्रांति ला दी है।ऊर्जा का एक बहुत बड़ा स्रोत खोजा गया है।यह आशा और खतरे से भरा हुआ है।जब हम परमाणु के बारे में सोचते हैं तो हम विनाश के बारे में सोचते हैं।लेकिन युद्ध की बात ऐसी ही है।परमाणु ऊर्जा का उपयोग मानव जाति की सेवा के लिए किया जा सकता है ।             उज्ज्वल पक्ष:- परमाणु ऊर्जा पृथ्वी को स्वर्ग में बदल सकती है।इसके लाभ कई हैं इसका उपयोग रचनात्मक और शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है परिणाम हर क्षेत्र में अच्छा होगा पृथ्वी ही ...

हमारी सामाजिक बुराइयां, सामाजिक कुरीतियों पर निबंध लिखे

  " बुराई अनपेक्षित है और हमेशा मानव और हमारे बिस्तर साझा करता है और हमारी अपनी मेज पर खाती है।"                                                             डब्लयू.एच. ऑडेन परिचय:-         भारत अपने आप में एक छोटी सी दुनिया माना जाता है क्योंकि विभिन्न जातियों, समुदायों और धर्मों के लोग यहां रहते हैं।इन लोगों के जीवन के विभिन्न दर्शन हैं वे कई तरह से एक दूसरे से काफी अलग हैं।इस प्रकार उनमें से कुछ का दृष्टिकोण सकारात्मक होता है जबकि दूसरे का दृष्टिकोण नकारात्मक होता है।इसलिए हमारे समाज में अच्छाई और बुराई शामिल है।हमारे समाज की कुछ बुरी आदतों को नुकसान पर चर्चा की जाती है। निम्नलिखित बिंदुओ में हमने हमारी सामाजिक बुराइयां के बारे में जाना है। सांप्रदायिकता:-                      इन विदेशियों के साथ जो बुरी बुराई आयी वह सांप्रदायिक उन्माद थी।यह सबसे अधिक है ,दंग...