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How to solve natural environment?

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How to solve natural environment?  What is the analysis and interpretation of environmental awareness? Let us know how to solve environmental problems. Before solving the problems of the environment, we have to understand what is the problem of the environment, so let's know what is the problem of the environment and how to solve it? https://youtube.com/shorts/dGWSQiW3s-c?feature=share The challenges facing South Asian countries are to manage and protect land, water, and forest and air resources, to provide an appropriate standard of living, and to provide other environmental services that are currently devoid of them. At the same time, increasing the growth rate so that people can be inspired. Environment issue is an important problem for South Asian countries. South Asian countries are associated with problems like rapid urbanization, insanitary defecation facility, uncontrolled industrialization, deforestation etc. For example the construction of large dams, water systems and na...

स्वतंत्रता और कानून (LIBERTY AND LAW)

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 स्वतंत्रता और कानून (LIBERTY AND LAW) "राज्य का कानून" और "मनुष्य की स्वतंत्रता ऊपर से देखने पर परस्पर विरोधी बातें प्रतीत होती है। कुछ लेखकों ने दोनों के बीच स्वाभाविक विरोध माना है। किंतु गंभीरता से विचार करने पर इस सिद्धांत की कमियाँ समझ में आ जायेंगी। यहाँ हम स्वतंत्रता' और 'कानून के आपसी संबंधों के विषय में चार खास विचारधाराओं का वर्णन करेंगे। अराजकतावादी सिद्धांत कानून एक बुराई है। (Anarchist Doctrines: Law is an Evil) अराजकतावादियों ने राज्य और उसके कानूनों को जन-स्वतंत्रता का विरोधी माना है। क्रोपाटकिन (Kropotkin) औ चाकुनिन (Bakunin) का कहना है कि राज्य एक बुराई है और जन क्रांति द्वारा उसका तुरंत विनाश कर देना चाहिए रूसी विद्वान टाल्सटाय (Tolstoy) भी अराजकतावादी ही थे, यद्यपि उन्होंने हिंसक क्रांति द्वारा नहीं, बल्कि शांतिपूर्ण उप से राज्य की समाप्ति पर बल दिया है। इन विद्वानों के अनुसार समाज का संगठन ऐच्छिक सहयोग और स्वतंत्रता के आपर पर किया जाए, राजनीतिक आधार पर नहीं। उन्होंने जिस समाज का चित्र खींचा है, उसमें 'व्यवस्था' तो होगी परंतु 'विवश...

स्वतंत्रता के विभिन्न प्रकार ,VARIOUS FORMS OF LIBERTY

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स्वतंत्रता के विभिन्न प्रकार (VARIOUS FORMS OF LIBERTY ) मोटे रूप से स्वतंत्रता के तीन प्रकार हैं- नागरिक स्वंतत्रता, राजनीतिक स्वतंत्रता और आर्थिक स्वतंत्रता प्रायः यह कहा जाता है कि उदारवादियों ने नागरिक और राजनीतिक स्वतंत्रता को प्राथमिकता दी, जबकि मार्क्सवादियों ने आर्थिक अधिकारों को। नीचे हम स्वतंत्रता के इन तीनों प्रकारों के साथ-साथ 'राष्ट्रीय स्वतंत्रता' की भी चर्चा करेंगे। 1. नागरिक स्वतंत्रता (Civil Liberty)-नागरिक स्वतंत्रता के अंतर्गत निम्नलिखित स्वतंत्रताऍ शामिल हैं: (i) जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा (Protection of Life and Personal Liberty)- इसका अर्थ है कि प्रत्येक व्यक्ति को जीवित रहने का अधिकार है। प्राणरक्षा के लिए एक व्यक्ति आक्रमणकारी की जान तक ले सकता है। सरकार लोगों को मनमाने ढंग से गिरफ्तार नहीं कर सकती। मानव अधिकार घोषणापत्र (Universal Declaration of Human Rights) के अंतर्गत कहा गया है कि "किसी को भी उत्पीड़क, क्रूर, अमानवीय और निम्न कोटि की सजा नहीं दी जाएगी।" इसी प्रकार आहार-विहार, वेश-भूषा और रहन-सहन की दृष्टि से नागरिक स्वतंत्र हैं। ...

स्वतंत्रता की अवधारणा (THE CONCEPT OF LIBERTY)

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 स्वतंत्रता की अवधारणा (THE CONCEPT OF LIBERTY) https://www.edukaj.in/2023/02/astronomers-succeeded-by-discovering-12.html हर युग का इतिहास 'स्वतंत्रता' और राजसत्ता' के बीच संघर्ष का इतिहास रहा है। स्वतंत्रता के नाम पर जहाँ बड़े से बड़ा बलिदान किया गया है, वहीं उसकी आड़ में बहुत सी बुराइयों को भी बढ़ावा मिला है। 'स्वतंत्रता' के आदर्श से प्रेरित होकर मानव जाति आरंभ से ही संघर्ष करती आ रही है। यह संघर्ष सदा नए-नए रूपों में प्रकट होता आया है। 17वीं और 18वीं शताब्दी में स्वतंत्रता का अर्थ केवल "राजाओं के अत्याचार से छुटकारा" समझा जाता था; परंतु उसके बाद राजनीतिक विचारों में एक क्रांतिकारी परिवर्तन आया। स्वतंत्रता की भावना ने 'लोकतंत्रीय शासन को बढ़ावा दिया। कुछ समय बाद यह कहा जाने लगा कि 'स्वतंत्रता' की अनुभूति के लिए 'समानता' भी जरूरी है। https://www.edukaj.in/2023/01/today-we-will-know-who-is-first.html  लोकतंत्र और समाजवाद, ये दोनों एक-दूसरे के विरोधी नहीं, पूरक हैं। https://www.edukaj.in/2022/05/periar-on-identity-in-hindi.html स्वतंत्र...

PERIAR ON IDENTITY IN HINDI,अस्मिता के संबंध में पेरियार के विचार

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अस्मिता के संबंध में पेरियार के विचार (PERIAR ON IDENTITY) भारतीय समाज की यह विशेषता है कि इसमें जितना तीव्र 'वर्ग संघर्ष' है, उतना ही तेज, बल्कि उससे कुछ ज्यादा ही, वर्ग संघर्ष' भी है, जिसे प्रायः जाति प्रथा का नाम दिया जाता है। भारत में 'जाति विनाश' अभियान को बहुत जोर-शोर से चलाने वाले नेता रामास्वामी नावकर (1879-1973) हुए, जिन्हें उनके अनुयायी श्रद्धाभाव से 'पेरियार' कहकर बुलाते हैं। तमिल भाषा में पेरियार' शब्द का अर्थ है महापुरुष (Great Man) अथवा 'वयोवृद्ध' (Elder) | पेरियार का संक्षिप्त जीवन वृत्त (A BRIEF ACCOUNT OF PERIAR'S LIFE) पेरियार का जन्म तमिलनाडु के कोयंबतूर जिले में सन् 1879 में हुआ। जातिप्रथा, जो देश के लिए बड़ी बातक सिद्ध हुई, दक्षिण भारत में बड़े विकराल रूप में विद्यमान थी। वहाँ बहुत बड़ी संख्या में ऐसे लोग रहते थे जिन्हें 'अस्पृश्य और निचली जाति का घोषित किया गया। इन्हें कई नामों से पहचाना जाता था, जैसे शुद्र, पैरिआ (pariah), चाण्डाल, आदि। रामास्वामी का जन्म दलित परिवार में नहीं हुआ। नायकरों को हम दक्षिण भारत की पिछड़ी...

मानव अधिकार (HUMAN RIGHTS)

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 मानव अधिकार (HUMAN RIGHTS) मानव अधिकारों का क्या अर्थ है?  मानव अधिकारों के अंतर्गत वे अधिकार शामिल हैं जो कि सभी व्यक्तियों को मिलने चाहिएँ। वंश, वर्ण, लिंग, मज़हब, जाति या राष्ट्रीयता के आधार पर किसी भी व्यक्ति के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा। .'मानव अधिकार' विषय अब बहुत लोकप्रिय हो चुका है। परंतु इन अधिकारों के अंतर्गत जिन सुविधाओं, शक्तियों और माँगों की चर्चा की जाती है, उनकी उपज बहुत पहले ही हो चुकी थी। मानव अधिकारों के पीछे यह भावना काम करती है कि 'मानव गरिमा' (human dignity) की रक्षा की जाए। देखा जाए तो इस भावना का जन्म पृथ्वी पर मनुष्य के विकास के साथ ही हुआ, क्योंकि गरिमा के बिना न तो जीवन-यापन ही संभव था और न मनुष्य सभ्यता व संस्कृति का विकास कर सकता था। लेकिन इसके साथ ही अधिकारों के दमन का सिलसिला भी शुरू हो गया था, क्योंकि दूसरों का शोषण करके अपने प्रभुत्व को बढ़ाना भी मानव की एक सहज वृत्ति रही है। इसलिए अनाचार और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष की कहानी भी हजारों साल पुरानी है। भारत में जब बुद्ध और महावीर ने जाति प्रथा को अन्यायपूर्ण ठहराया तब वे मनुष्य की सम...