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स्वतंत्रता और कानून (LIBERTY AND LAW)

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 स्वतंत्रता और कानून (LIBERTY AND LAW) "राज्य का कानून" और "मनुष्य की स्वतंत्रता ऊपर से देखने पर परस्पर विरोधी बातें प्रतीत होती है। कुछ लेखकों ने दोनों के बीच स्वाभाविक विरोध माना है। किंतु गंभीरता से विचार करने पर इस सिद्धांत की कमियाँ समझ में आ जायेंगी। यहाँ हम स्वतंत्रता' और 'कानून के आपसी संबंधों के विषय में चार खास विचारधाराओं का वर्णन करेंगे। अराजकतावादी सिद्धांत कानून एक बुराई है। (Anarchist Doctrines: Law is an Evil) अराजकतावादियों ने राज्य और उसके कानूनों को जन-स्वतंत्रता का विरोधी माना है। क्रोपाटकिन (Kropotkin) औ चाकुनिन (Bakunin) का कहना है कि राज्य एक बुराई है और जन क्रांति द्वारा उसका तुरंत विनाश कर देना चाहिए रूसी विद्वान टाल्सटाय (Tolstoy) भी अराजकतावादी ही थे, यद्यपि उन्होंने हिंसक क्रांति द्वारा नहीं, बल्कि शांतिपूर्ण उप से राज्य की समाप्ति पर बल दिया है। इन विद्वानों के अनुसार समाज का संगठन ऐच्छिक सहयोग और स्वतंत्रता के आपर पर किया जाए, राजनीतिक आधार पर नहीं। उन्होंने जिस समाज का चित्र खींचा है, उसमें 'व्यवस्था' तो होगी परंतु 'विवश...

स्वतंत्रता की अवधारणा (THE CONCEPT OF LIBERTY)

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 स्वतंत्रता की अवधारणा (THE CONCEPT OF LIBERTY) https://www.edukaj.in/2023/02/astronomers-succeeded-by-discovering-12.html हर युग का इतिहास 'स्वतंत्रता' और राजसत्ता' के बीच संघर्ष का इतिहास रहा है। स्वतंत्रता के नाम पर जहाँ बड़े से बड़ा बलिदान किया गया है, वहीं उसकी आड़ में बहुत सी बुराइयों को भी बढ़ावा मिला है। 'स्वतंत्रता' के आदर्श से प्रेरित होकर मानव जाति आरंभ से ही संघर्ष करती आ रही है। यह संघर्ष सदा नए-नए रूपों में प्रकट होता आया है। 17वीं और 18वीं शताब्दी में स्वतंत्रता का अर्थ केवल "राजाओं के अत्याचार से छुटकारा" समझा जाता था; परंतु उसके बाद राजनीतिक विचारों में एक क्रांतिकारी परिवर्तन आया। स्वतंत्रता की भावना ने 'लोकतंत्रीय शासन को बढ़ावा दिया। कुछ समय बाद यह कहा जाने लगा कि 'स्वतंत्रता' की अनुभूति के लिए 'समानता' भी जरूरी है। https://www.edukaj.in/2023/01/today-we-will-know-who-is-first.html  लोकतंत्र और समाजवाद, ये दोनों एक-दूसरे के विरोधी नहीं, पूरक हैं। https://www.edukaj.in/2022/05/periar-on-identity-in-hindi.html स्वतंत्र...

मानव अधिकार (HUMAN RIGHTS)

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 मानव अधिकार (HUMAN RIGHTS) मानव अधिकारों का क्या अर्थ है?  मानव अधिकारों के अंतर्गत वे अधिकार शामिल हैं जो कि सभी व्यक्तियों को मिलने चाहिएँ। वंश, वर्ण, लिंग, मज़हब, जाति या राष्ट्रीयता के आधार पर किसी भी व्यक्ति के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा। .'मानव अधिकार' विषय अब बहुत लोकप्रिय हो चुका है। परंतु इन अधिकारों के अंतर्गत जिन सुविधाओं, शक्तियों और माँगों की चर्चा की जाती है, उनकी उपज बहुत पहले ही हो चुकी थी। मानव अधिकारों के पीछे यह भावना काम करती है कि 'मानव गरिमा' (human dignity) की रक्षा की जाए। देखा जाए तो इस भावना का जन्म पृथ्वी पर मनुष्य के विकास के साथ ही हुआ, क्योंकि गरिमा के बिना न तो जीवन-यापन ही संभव था और न मनुष्य सभ्यता व संस्कृति का विकास कर सकता था। लेकिन इसके साथ ही अधिकारों के दमन का सिलसिला भी शुरू हो गया था, क्योंकि दूसरों का शोषण करके अपने प्रभुत्व को बढ़ाना भी मानव की एक सहज वृत्ति रही है। इसलिए अनाचार और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष की कहानी भी हजारों साल पुरानी है। भारत में जब बुद्ध और महावीर ने जाति प्रथा को अन्यायपूर्ण ठहराया तब वे मनुष्य की सम...

व्यायाम / योग के लाभ

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व्यायाम / योग के लाभ भूमिका:-           योग का इतिहास बहुत पुराना है। इसकी शुरुआत कब और कैसे हुई इस बारे मी कोई निश्चित जानकारी या प्रमाण उपलब्ध नहीं है। परंतु इतना अवश्य कहा जा सकता है को योग भारत कि ही देन है। इतिहासकारों ने इसकी शुरुआत को लेकर भिन्न - भिन्न मत हैं कई इतिहासकार इसकी उत्पति सिंधु घाटी सभ्यता के समय की मानते हैं। क्योंकि उस समय की कई मूर्तियों के आसन योग के विभिन्न आसनों जैसे पाए गए है। योग की प्राचीनता का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है की विभिन्न वेदों , उपनिषदों , रामायण तथा महाभारत जैसे ग्रन्थों में भी योग क्रियाओं का वर्णन किया गया है। महर्षि पतंजलि ने लगभग ईसा पूर्व शताब्दी में योग पर एक व्यवस्थित ग्रन्थ " योग शास्त्र " लिखा। प्राचीन कवियों एवं संतो जैसे - कबीर , सूरदास तथा तुलसीदास जी ने भी अपनी - अपनी रचनाओं में योग का वर्णन किया है। भारतीय संस्कृति के अभिन्न अंग होने के साथ - साथ योग आज पूरे विश्व में तेजी से प्रचलित है । हर वर्ष 21 जून को विश्व योग दिवस मनाया जाता है।           आज की भादौड़ से भरी ...

Benefits of yoga and exercise

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Benefits of yoga and exercise Role :-                  The history of yoga is very old. There is no definite information or evidence available about when and how it started. But all that can be said is India 's gift to yoga. Historians have different opinions about its beginnings and many historians consider it The Times of the Indus valley civilization. Because many of the idols of that time have been found to have different asanas of asana yoga. The antiquity of yoga can be gauged from the fact that in various vedas like vedas, upanishads, ramayana and mahabharata also yoga activities are described. Maharishi patanjali wrote a systematic text on yoga in about the century b. c. The ancient poets and saints like kabir, surdas and tulsidas have also described the yoga in their writings. Yoga, as it is an integral part of Indian culture, is fast prevalent all over the world today. World yoga day is celebrated every year on June 21.   ...