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संघर्षों की प्रकृति Nature of Conflicts

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संघर्षों की प्रकृति (Nature of Conflicts ) परिचय संघर्ष एक ऐसा शब्द है , जिसके अनेकों अर्थ हो सकते हैं, जैसे-लड़ाई, वाद-विवाद, युद्ध, असंगति आदि। संघर्ष का शाब्दिक अर्थ है “एक दूसरे से टकराव"। जब दो या दो से अधिक व्यक्तियों में या किसी समूह या वर्ग में किसी एक ही विषय पर विरोधाभास की स्थिति बन जाती है, तो संघर्ष की उत्पत्ति होती है। ऐसे में वे व्यक्ति अपना लक्ष्य बदलकर या अपना लक्ष्य छोड़कर आपस में समझौता करते हैं। कई बार मध्यस्थता के द्वारा समझौता कराया जाता है। यदि संघर्ष अपनी चरम सीमा पर पहुँच जाए, तो वह युद्ध का रूप ले सकता है या फिर बड़े झगड़े में परिवर्तित हो सकता है। संघर्ष का एक कारण संसाधनों की अपर्याप्तता या वितरण का दोष माना जा सकता है। संघर्ष किसी भी मुद्दे पर हो किंतु उसे सुलझाना जरूरी होता है, अन्यथा यह किसी बड़ी क्षति का कारण बन सकता है। संघर्ष का अर्थ संघर्ष का सामान्य अर्थ होता है-टकराव। अलग-अलग विद्वानों ने संघर्ष की विभिन्न परिभाषाएँ दी हैं। कुछ विद्वानों ने संघर्ष को आपसी विरोध, प्रतिद्वंद्विता या आपसी प्रतिरोध की स्थिति कहा है, जिसके अंतर्गत व्यक्तियों की ग...

स्वतंत्रता की मार्क्सवादी अवधारणा (MARXIST CONCEPT OF FREEDOM)

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 स्वतंत्रता की मार्क्सवादी अवधारणा (MARXIST CONCEPT OF FREEDOM) https://www.edukaj.in/2023/02/astronomers-succeeded-by-discovering-12.html मार्क्सवादियों ने स्वतंत्रता के उदारवादी सिद्धांत की कटु आलोचना की है और स्वतंत्रता की एक नवी अवधारणा प्रस्तुत की है, जिसका वर्णन निम्नलिखित शीर्षकों के अंतर्गत किया जा सकता है: https://www.edukaj.in/2023/01/today-we-will-know-who-is-first.html वर्गों में विभाजित समाज में असली स्वतंत्रता के लिए कोई स्थान नहीं है (There cannot be any Genuine Freedom in a Class-divided Society) स्वतंत्रता के विभिन्न प्रकार क्या है?  अवश्य पढ़े:- https://www.edukaj.in/2022/05/various-forms-of-liberty.html मार्क्सवादी विचारकों ने पूँजीवादी समाज का विश्लेषण करके उसकी असंगतियों की ओर हमारा ध्यान आकृष्ट किया। पूँजीवादी समाज में उत्पादन और वितरण प्रणाली दोषयुक्त होने के कारण सारी संपत्ति पूँजीपतियों के पास एकत्रित हो जाती है। जाम लोगों के पास जीवन निर्वाह करने भर को या उससे भी कम चीजें होती है। इस व्यवस्था में श्रमिकों, किसानों और • सर्वहारावर्ग के कष्टों का कोई अं...

स्वतंत्रता के विभिन्न प्रकार ,VARIOUS FORMS OF LIBERTY

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स्वतंत्रता के विभिन्न प्रकार (VARIOUS FORMS OF LIBERTY ) मोटे रूप से स्वतंत्रता के तीन प्रकार हैं- नागरिक स्वंतत्रता, राजनीतिक स्वतंत्रता और आर्थिक स्वतंत्रता प्रायः यह कहा जाता है कि उदारवादियों ने नागरिक और राजनीतिक स्वतंत्रता को प्राथमिकता दी, जबकि मार्क्सवादियों ने आर्थिक अधिकारों को। नीचे हम स्वतंत्रता के इन तीनों प्रकारों के साथ-साथ 'राष्ट्रीय स्वतंत्रता' की भी चर्चा करेंगे। 1. नागरिक स्वतंत्रता (Civil Liberty)-नागरिक स्वतंत्रता के अंतर्गत निम्नलिखित स्वतंत्रताऍ शामिल हैं: (i) जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा (Protection of Life and Personal Liberty)- इसका अर्थ है कि प्रत्येक व्यक्ति को जीवित रहने का अधिकार है। प्राणरक्षा के लिए एक व्यक्ति आक्रमणकारी की जान तक ले सकता है। सरकार लोगों को मनमाने ढंग से गिरफ्तार नहीं कर सकती। मानव अधिकार घोषणापत्र (Universal Declaration of Human Rights) के अंतर्गत कहा गया है कि "किसी को भी उत्पीड़क, क्रूर, अमानवीय और निम्न कोटि की सजा नहीं दी जाएगी।" इसी प्रकार आहार-विहार, वेश-भूषा और रहन-सहन की दृष्टि से नागरिक स्वतंत्र हैं। ...

"भारत एक उभरती हुई शक्ति है" आर्थिक और सैन्य कारकों पर प्रकाश डालते हुए इस कथन की पुष्टि कीजिए। . "India is an emerging power". Higlighting economic and military factors make this statement.

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 "भारत एक उभरती हुई शक्ति है" आर्थिक और सैन्य कारकों पर प्रकाश डालते हुए इस कथन की पुष्टि कीजिए। . "India is an emerging power". Higlighting economic and military factors make this statement. एक अमरीको विद्वान स्टीफन पी. कोहेन ने अपनी 2001 में प्रकाशित पुस्तक India Emerging Power में उन विभिन्न तत्त्वों और कारकों का विश्लेषण किया है। उनके मतानुसार यह निर्धारित करने में सहायक होंगे कि क्या भारत निकट भविष्य में एक बड़ी शक्ति के रूप में उभर पाएगा या नहीं। भारत में निश्चय हो उभरने की क्षमता है और वह विश्व राजनीति में एक प्रमुख राष्ट्र के रूप में उभर रहा है। भारत की आर्थिक स्थिति -  कोई भी देश बड़ी शक्ति बन पाने की अपेक्षा क्यों करता है। उदय होती और उभरती शक्ति के विषय में लिखते हुए कोहेन ने यह विचार व्यक्त किए उभरती शक्ति के विचार में निहित है पदसोपानीय वर्ग व्यवस्था में ऊंचे सोपान पर पहुंचने की इच्छा। इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए, अपना स्तर ऊँचा उठाने के लिए आर्थिक, सैनिक और राजनीति क्षमता प्राप्त करनी चाहिए। जहाँ तक भारत की आर्थिक व्यवस्था का प्रश्न है, अभी हाल के व...

भारतीय किसान , भारतीय किसान की दशा ,भारतीय किसान: देश की रीढ़

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  भारतीय किसान  कृषक का स्वभाव एवं श्रम  भारत गांवों का देश है । भारत का ह्रदय गांवों में ही बसता है । गांवो में ही परिश्रम और सेवा के अवतार किसान बसते हैं, जो नगरवासियों के अन्नदाता ही नहीं सृष्टि के पालक हैं । भारतीय किसान ' कठोर परिश्रम ' , सरल ह्रदय , त्याग और तपस्वी जीवन , सादगी , जैसे गुणों  का पर्याय है । कड़कड़ाती सर्दी , चिलचिलाती धूप , घनघोर वर्षा , हाड़ कपा देने वाली सर्दी में भी वह एक तपस्वी की भांति अपनी साधना में लीन रहता है । वह हर विपत्ति को चुपचाप सहन कर लेता है , अभावों में जीने की उसे आदत है , रूखा - सुखा खाकर वह अपना पेट भर लेता है , मोटा कपड़ा पहनकर वह अपना तन ढंक लेता है । अपने इस कठोर जीवन की वह न तो कभी किसी से शिकायत करता है  तथा न ही स्वंय के लिए ऐश्वर्य एवं भोग - विलास की सामग्री की मांग । उसके जीवन का तो बस एक ही उद्देश्य है - मिट्टी से सेना उत्पन्न करना और अन्नपूर्णा की तरह दूसरो का पेट भरना । https://www.edukaj.in/2022/12/sustainable-human-development-issues.html एक बार नारद ने भगवान विष्णु से पूछा , " हे प्रभु! अपका परम भक्त कौन है...

T.H.Marshall's theory that rights followed a linear path in hindi ,मार्शल के सिद्धान्त के संदर्भ में नागरिकता का विश्लेषण कीजिए

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मार्शल के सिद्धान्त के संदर्भ में नागरिकता का विश्लेषण कीजिए?                                     अथवा                                        नागरिकता के तीन मूल तत्वों पर प्रकाश डालते हुए टी. एच . मार्शल के सिद्धान्त की आलोचनात्मक समीक्षा कीजिए? https://www.edukaj.in/2023/02/astronomers-succeeded-by-discovering-12.html टी. एच . मार्शल का सिद्धान्त : अधिकारों का विकास रेखीय है- टी. एच . मार्शल ने अपने सुप्रसिद्ध ग्रन्थ ' नागरिकता और सामाजिक वर्ग ' में नागरिकता के दो लक्षण माने है। एक तो यह सभी व्यक्तियों की समाज में बराबर हैसियत या स्तिथि है, और दूसरे, इस हैसियत की वजह से उन्हें समान अधिकार उपलब्ध हैं। साथ ही उनके कुछ दायित्व भी है। उसने एक नागरिक के तीन तरह के अधिकारो का जिक्र किया है - नागरिक अधिकार , राजनीतिक अधिकार तथा सामाजिक अधिकार। अन्तिम श्रेणी के अतंर्गत उसने मुख्य रूप से सामाजिक - आर्थिक सु...