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Essay on man

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 A male In today's era people say that men and women are equal, but somewhere this statement is wrong. We must have often heard that women cannot do what men can do. Today I will tell you about a man . A man who is the head of the household. A man is the son of the house and the father. The era does not write about a man, wherever you look, you get to read poetry posts or essays on women, mothers only. But what problem a man goes through is not written anywhere. A man never tells what is pain, does not express it because society has filled his mind that a man never cries, does not share his pain with anyone, just because the people of the society will say.In today's era, women and men have been given equal rights everywhere, whether it is studies or jobs. But then why women have equal rights in bus metro etc., then why separate rights in bus metro, because because of some men, when women say that all women are not the same, then men believe but when men It is said that not all...

Indian farmer

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 Indian farmer Farmer's nature and labor India is a country of villages. The heart of India resides in the villages only. Farmers, the embodiment of labor and service, reside in the villages, who are not only the food givers of the townspeople but also the custodians of the universe. Indian farmer is synonymous with qualities like 'hard work', simple heart, sacrifice and ascetic life, simplicity.He remains absorbed in his spiritual practice like an ascetic even in the bitter winter, scorching sun, heavy rain, and cold winter.He tolerates every adversity quietly, he has a habit of living in deprivation, he fills his stomach by eating dry and dry, he covers his body by wearing thick clothes.He never complains to anyone about this harsh life, nor does he demand the material of opulence and enjoyment for himself.There is only one purpose of his life - to generate an army from the soil and feed others like Annapurna. https://www.edukaj.in/2021/09/blog-post.html Once Narada asked...

"भारत एक उभरती हुई शक्ति है" आर्थिक और सैन्य कारकों पर प्रकाश डालते हुए इस कथन की पुष्टि कीजिए। . "India is an emerging power". Higlighting economic and military factors make this statement.

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 "भारत एक उभरती हुई शक्ति है" आर्थिक और सैन्य कारकों पर प्रकाश डालते हुए इस कथन की पुष्टि कीजिए। . "India is an emerging power". Higlighting economic and military factors make this statement. एक अमरीको विद्वान स्टीफन पी. कोहेन ने अपनी 2001 में प्रकाशित पुस्तक India Emerging Power में उन विभिन्न तत्त्वों और कारकों का विश्लेषण किया है। उनके मतानुसार यह निर्धारित करने में सहायक होंगे कि क्या भारत निकट भविष्य में एक बड़ी शक्ति के रूप में उभर पाएगा या नहीं। भारत में निश्चय हो उभरने की क्षमता है और वह विश्व राजनीति में एक प्रमुख राष्ट्र के रूप में उभर रहा है। भारत की आर्थिक स्थिति -  कोई भी देश बड़ी शक्ति बन पाने की अपेक्षा क्यों करता है। उदय होती और उभरती शक्ति के विषय में लिखते हुए कोहेन ने यह विचार व्यक्त किए उभरती शक्ति के विचार में निहित है पदसोपानीय वर्ग व्यवस्था में ऊंचे सोपान पर पहुंचने की इच्छा। इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए, अपना स्तर ऊँचा उठाने के लिए आर्थिक, सैनिक और राजनीति क्षमता प्राप्त करनी चाहिए। जहाँ तक भारत की आर्थिक व्यवस्था का प्रश्न है, अभी हाल के व...

बढ़ते उद्योग, सिकुड़ते वन , बढ़ती जनसंख्या : सिकुड़ते वन , वन रहेंगे , हम रहेंगे , वन और हमारा पर्यावरण , अगर वन न होते , वनों से पर्यावरण संरक्षण

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बढ़ते उद्योग, सिकुड़ते वन   1. वनों के लाभ-प्राकृतिक सौंदर्य तथा पर्यावरण संतुलन प्रकृति का अनुपम उपहार है। इस अमूल्य संपदा के कोष को बनाए रखने की महती आवश्यकता है। पेड़-पौधे तथा मनुष्य एक-दूसरे के पोषक तथा संरक्षक है। जहाँ एक ओर पेड़-पौधे मनुष्य के संरक्षण में उगते हैं, वहीं दूसरी और मानव को भी आजीवन देड-पौधों पर आश्रित रहना पड़ता है। इन वृक्षों पेड़-पौधों अथवा वनों से प्राकृतिक तथा पर्यावरण संतुलन बना रहता है। संतुलित व तथा प्रदूषण से बचाव के लिए भी वनों के संरक्षण को नियंत आवश्यकता है। इतना ही नहीं शस्य श्यामला भूमि को बंजर होने बचाने भू - क्षरण , पर्वत-स्खलन आदि को रोकने में भी वन संरक्षण अनिवार्य होता है। प्रकृतिक सुषमा के घर है। इन्हीं क अनेक वन्य प्राणियों को आश्रय मिलता है।  हमारे देश में तो वृक्षों को पूजने की परंपरा है। हमारी संस्कृति का कार्य माना जाता है तथा किसी फलदार अथवा हरे-भरे वृक्ष को काटना पाप पुराणों के अनुसार एक वृक्ष लगाने से उठना हो पुल पुढे का खेद का विषय है कि आज हम वन संरक्षण के प्रति उसीहोर कर उनको कटाई करके अपने पर कुल्हाड़ी मार रहे हैं, जिससे प्रकृ...

भारतीय किसान , भारतीय किसान की दशा ,भारतीय किसान: देश की रीढ़

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  भारतीय किसान  कृषक का स्वभाव एवं श्रम  भारत गांवों का देश है । भारत का ह्रदय गांवों में ही बसता है । गांवो में ही परिश्रम और सेवा के अवतार किसान बसते हैं, जो नगरवासियों के अन्नदाता ही नहीं सृष्टि के पालक हैं । भारतीय किसान ' कठोर परिश्रम ' , सरल ह्रदय , त्याग और तपस्वी जीवन , सादगी , जैसे गुणों  का पर्याय है । कड़कड़ाती सर्दी , चिलचिलाती धूप , घनघोर वर्षा , हाड़ कपा देने वाली सर्दी में भी वह एक तपस्वी की भांति अपनी साधना में लीन रहता है । वह हर विपत्ति को चुपचाप सहन कर लेता है , अभावों में जीने की उसे आदत है , रूखा - सुखा खाकर वह अपना पेट भर लेता है , मोटा कपड़ा पहनकर वह अपना तन ढंक लेता है । अपने इस कठोर जीवन की वह न तो कभी किसी से शिकायत करता है  तथा न ही स्वंय के लिए ऐश्वर्य एवं भोग - विलास की सामग्री की मांग । उसके जीवन का तो बस एक ही उद्देश्य है - मिट्टी से सेना उत्पन्न करना और अन्नपूर्णा की तरह दूसरो का पेट भरना । https://www.edukaj.in/2022/12/sustainable-human-development-issues.html एक बार नारद ने भगवान विष्णु से पूछा , " हे प्रभु! अपका परम भक्त कौन है...

समय का महत्व , Importance of time in Hindi

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  समय का महत्व  समय जीवन है और समय को नष्ट करना जीवन को नष्ट करना है । एक आम कहावत है कि " जो समय को नष्ट करता है , समय उसे नष्ट कर देता है । " समय का सदुपयोग विकास की कुंजी         जीवन नदी की धारा के समान है । जैसे नदी की धारा ऊंची - नीची भूमि को पार करती निरन्तर आगे बढ़ती रहती है उसी प्रकार जीवन की धारा भी सुख - दुख तथा सफलता - असफलता के अनेक संघर्षों को सहते - भोगते आगे बढ़ती रहती है । बहना जीवन है और ठहराव मृत्यु । जीवन का उद्देश्य निरन्तर आगे बढ़ते रहने में है - इसी में सुख है , आंनद है । लेकिन सुख - आंनद और आगे बढ़ने में जो वस्तु काम करती है , वह है समय । जो भोगते हुए समय को पकड़कर इसके साथ - साथ चल सकते हैं , वही तो जीवन में कामयाब होते है । वस्तुत: समय का सदुपयोग ही विकास की कुंजी है । अमूल्य धन              अंग्रेजी में समय को ' धन ' कहा जाता है , पर समय ' धन ' से कहीं ज्यादा कीमती है , अमूल्य है । धन आज है , कल नष्ट हो गया , परसों फिर आ सकता है । लेकिन जो समय अतीत के गर्त में समा गया , लाख चेष्टा करने पर भी वह ल...

Democracy in India

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  Democracy in India  ' Your Freedom Ends Where My Freedom Starts ' is the key to Democracy  " Your freedom ends where my freedom starts", this is the principal of real democracy. Introduction :-                    Political events that have recently overtaken the country are disturbing, Twice in two years we have gone to the polls. Each time , the outcome is a fractured verdict. People did not give mandate to a single party. Each time the elected government has been unable to govern the country for the full tenure.                   This is the undivided rule of modern democracy that one has the right to do his personal affairs without any interference of outer agency i.e., your freedom ends where my freedom starts. Blessings of democracy:-                        Democracy is a right. Every freedom loving citizen shoul...